ग्रेटर नोएडा में अवैध कॉलोनियों का बड़ा खेल, बिलासपुर में कॉलोनाइजरों ने कब्जा ली जमीन
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अवैध कॉलोनियों के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया है. कस्बा बिलासपुर के आसपास हरियाली खत्म कर जमीन को प्लॉटिंग के लिए तैयार किया जा रहा है. इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
ग्रेटर नोएडा के बिलासपुर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के निर्माण को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. एक समाजसेवी ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से लिखित शिकायत की है, जिसमें बड़े पैमाने पर अवैध कालोनियों को विकसित करने के खेल का खुलासा हुआ है. शिकायत पर संज्ञान लेते हुए प्राधिकरण ने भले ही जांच टीम गठित कर दी हो, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्यों हर बार प्राधिकरण कुंभकर्णी नींद में सोया रहता है, जिससे इस तरह की अवैध कॉलोनाइजरों को कब्जे की छूट मिलती रहती है.
दरअसल, समाजसेवी द्वारा भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि बिलासपुर और आसपास की जमीन पर बिना अनुमति के अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं. इतना ही नहीं, पेड़ों की कटाई कर बड़े स्तर पर प्लॉटिंग का काम भी जारी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति बनाकर तत्काल कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रसूखदारों के खिलाफ कार्रवाई हो पाएगी?
ग्रेटर नोएडा निवासी समाजसेवी ने 16 जनवरी 2026 को प्राधिकरण को शिकायत भेजी थी. शिकायत में कहा गया कि ग्राम बिलासपुर, परगना दनकौर और तहसील सदर क्षेत्र में कई अवैध बिल्डर और कॉलोनाइजर सक्रिय हैं. आरोप है कि ये लोग बिना किसी सरकारी मंजूरी के कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं. शिकायत में यह भी बताया गया कि संबंधित भूमि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में आती है. इसके बावजूद बिल्डर प्राधिकरण से नक्शा या अनुमति लिए बिना प्लॉट बेच रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर तेजी से सड़कें और छोटे निर्माण भी कराए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में बड़ी अव्यवस्था पैदा हो सकती है.
मामले में पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं भी सामने आई हैं. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अवैध कॉलोनियों के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया है. कस्बा बिलासपुर के आसपास हरियाली खत्म कर जमीन को प्लॉटिंग के लिए तैयार किया जा रहा है. इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
चार सदस्यीय जांच समिति का गठन
प्राधिकरण ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई है. समिति की अध्यक्षता अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा सिंह करेंगी. इसके अलावा अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित यादव, महाप्रबंधक परियोजना ए.के. सिंह और वरिष्ठ प्रबंधक परियोजना नागेंद्र सिंह को समिति में शामिल किया गया है. समिति को पूरे मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं.
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