ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसाइटी में ‘उल्लू का आतंक’, रात के अंधेरे में सिर पर झपट्टा मार जख्मी कर रहा शिकारी पक्षी

Sep 12, 2026 - 16:06
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ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसाइटी में ‘उल्लू का आतंक’, रात के अंधेरे में सिर पर झपट्टा मार जख्मी कर रहा शिकारी पक्षी

जेएमबी न्यूज़ विशेष संवाददाता हर्ष चपराना 

ग्रेटर नोएडा:- ग्रेटर नोएडा वेस्ट की प्रतिष्ठित ला रेजिडेंशिया सोसाइटी (La Residentia Society) में इन दिनों एक उल्लू के जोड़े के खौफ से लोग दहशत में हैं। सोसाइटी परिसर में पिछले एक हफ्ते के भीतर उल्लुओं के जानलेवा हमले में लगभग 5 लोग घायल हो चुके हैं। रात का अंधेरा होते ही यह शिकारी पक्षी अचानक आसमान या पेड़ों से नीचे की तरफ आता है और पैदल चल रहे लोगों के सिर या शरीर पर अपनी नुकीली चोंच और पंजों से वार कर देता है। इस अनोखे और डरावने हमले के बाद सोसाइटी के निवासियों ने वन विभाग से तुरंत कार्यवाही की मांग की है। बता दें कि सोसाइटी के निवासियों के मुताबिक, परिसर की सड़कों, पेड़ों और स्ट्रीट लाइट के पास अक्सर उल्लुओं का एक जोड़ा बैठा दिखाई देता है। गुरुवार और शुक्रवार की रात को भी यह हमला जारी रहा। गुरुवार रात को टहल रहे बिनॉय नाम के एक निवासी पर उल्लू ने अचानक पीछे से झपट्टा मार दिया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। इसके अलावा कई अन्य लोग भी इसके शिकार हुए हैं, जिनमें से एक व्यक्ति को इतने गहरे घाव आए कि उसे रेबीज समेत अन्य जरूरी इंजेक्शन लगवाने पड़े। यह पूरी घटना सोसाइटी में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में भी कैद हो गई है।

शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हुए लोग!

उल्लू के इस अप्रत्याशित ‘हवाई हमले’ के बाद पूरी सोसाइटी में डर का माहौल बना हुआ है। निवासियों ने रात के समय परिसर में टहलना और बच्चों को पार्क में भेजना पूरी तरह बंद कर दिया है। शाम ढलते ही बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं। जरूरी काम से पार्किंग या लॉबी में जाने वाले लोग अब लाठी या सिर ढककर बाहर निकल रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण व वन विभाग से रेस्क्यू की मांग!लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए ला रेजिडेंशिया के निवासियों ने स्थानीय बिल्डर, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और वन विभाग (Forest Department) से लिखित शिकायत की है। लोगों की मांग है कि वन विभाग की एक विशेषज्ञ टीम को मौके पर भेजकर इन उल्लुओं को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित पकड़ा (रेस्क्यू) जाए और उन्हें उनके प्राकृतिक रिहायशी स्थान या घने जंगल में छोड़ा जाए, ताकि सोसाइटी के लोगों को इस डर से मुक्ति मिल सके।

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