नोएडा प्राधिकरण में बड़ा खेल? AGM संजीव बेदी पर करोड़ों की प्रॉपर्टी गड़बड़ी के आरोप
नोएडा प्राधिकरण के रेजिडेंशियल विभाग में तैनात AGM संजीव बेदी पर प्रॉपर्टी गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं. सूत्रों के मुताबिक नियमों की अनदेखी कर फर्जी नामांतरण और करोड़ों के खेल की आशंका जताई गई है.
नोएडा: नोएडा प्राधिकरण में एक बार फिर प्रॉपर्टी से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं. रेजिडेंशियल विभाग में तैनात AGM संजीव बेदी का नाम एक ऐसे मामले में सामने आया है, जिसमें नियमों को दरकिनार कर प्लॉट से जुड़े फैसले लेने के आरोप हैं. सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक-दो फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रॉपर्टी डीलरों के एक पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच की जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक, AGM संजीव बेदी पर रेजिडेंशियल विभाग में नियमों की अनदेखी कर प्रॉपर्टी से जुड़े फैसले लेने के आरोप हैं. कहा जा रहा है कि करोड़ों रुपये के प्लॉट से जुड़े मामलों में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. इन आरोपों ने विभाग के भीतर हलचल मचा दी है और पूरे मामले की गंभीरता को बढ़ा दिया है.
सेक्टर 145 के प्लॉट पर विवाद
नोएडा के सेक्टर 145 स्थित GT-108 प्लॉट का मामला इस विवाद का केंद्र बना हुआ है. आरोप है कि GPA टूटने के बावजूद ट्रांसफर मेमोरेंडम जारी कर दिया गया. यह नियमों के खिलाफ माना जा रहा है. इस फैसले के बाद प्लॉट मालिक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट से स्टे हासिल कर लिया.
सेक्टर 55 में नामांतरण की कोशिश
एक और मामला सेक्टर 55 के D-132 प्लॉट से जुड़ा है. यहां कथित तौर पर एक महिला के नाम फर्जी नामांतरण की तैयारी की जा रही थी. बताया जा रहा है कि यह प्रक्रिया भी नियमों के विपरीत थी. मामले की जानकारी सामने आने के बाद इस पर भी सवाल उठने लगे हैं.
बुजुर्ग दंपति की गुहार
इस पूरे मामले में एक बुजुर्ग दंपति को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा. उन्होंने अपनी शिकायत जनप्रतिनिधि तक पहुंचाई. बताया जाता है कि जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद ही संबंधित फाइल पर कार्रवाई रोकी गई. इससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है.
नेटवर्क के खुलासे से मचा हड़कंप
सूत्रों का दावा है कि इस मामले में केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है. इसमें प्रॉपर्टी डीलरों और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है. इस खुलासे के बाद प्राधिकरण में हड़कंप मच गया है. अब इस पूरे प्रकरण की गहन जांच की मांग तेज हो गई है.
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