पीएम मोदी ने किया गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ, यूपी में रोड कनेक्टिविटी को मिली नई रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. 594 किमी लंबा यह मार्ग मेरठ से प्रयागराज की दूरी छह घंटे में तय करने का दावा करता है और प्रदेश के विकास को गति देगा.
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाला सबसे लंबा सड़क मार्ग माना जा रहा है. सरकार का दावा है कि इससे न केवल दूरी कम होगी बल्कि यात्रा का समय भी घटेगा. यह परियोजना प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अहम साबित हो सकती है.
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से मेरठ से प्रयागराज तक की करीब 594 किलोमीटर की दूरी अब महज छह घंटे में तय की जा सकेगी. यह सफर पहले काफी लंबा और थकान भरा होता था. नए मार्ग से यात्रियों को राहत मिलेगी और दिल्ली से प्रयागराज की यात्रा भी आसान हो जाएगी. यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के दो छोरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा.
प्रधानमंत्री का संबोधन
उद्घाटन के दौरान Narendra Modi ने कहा कि मां गंगा के नाम पर इस एक्सप्रेसवे का नाम रखना गर्व की बात है. उन्होंने इसे प्रदेश के विकास की नई लाइफलाइन बताया. उनके अनुसार, यह सड़क परियोजना न केवल यात्रा को आसान बनाएगी बल्कि उत्तर प्रदेश के विकास को नई दिशा देगी. उन्होंने इसे मां गंगा का आशीर्वाद भी बताया.
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
यह एक्सप्रेसवे धार्मिक स्थलों तक पहुंच को भी आसान बनाएगा. गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिका देवी और त्रिवेणी संगम जैसे प्रमुख स्थलों तक अब कम समय में पहुंचा जा सकेगा. इससे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है. दिल्ली और पश्चिमी यूपी के लोग भी अब आसानी से इन तीर्थ स्थलों तक पहुंच सकेंगे.
स्पिरिचुअल कॉरिडोर को मजबूती
गंगा एक्सप्रेसवे पांच प्रमुख आध्यात्मिक कॉरिडोर को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. प्रयागराज-विंध्याचल-काशी और प्रयागराज-अयोध्या-गोरखपुर कॉरिडोर जैसे मार्ग अब अधिक सुगम होंगे. इससे धार्मिक यात्राएं आसान होंगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. इन कॉरिडोर के जरिए अलग-अलग धार्मिक स्थलों को एक मजबूत नेटवर्क में जोड़ा जाएगा.
जैन और बौद्ध तीर्थों को भी लाभ
यह एक्सप्रेसवे केवल हिंदू तीर्थों तक ही सीमित नहीं है. मेरठ का हस्तिनापुर जैन धर्म का प्रमुख केंद्र है, जबकि वाराणसी के पास सारनाथ बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण स्थल है. बेहतर सड़क संपर्क से इन स्थानों तक पहुंच आसान होगी. इससे विभिन्न धर्मों के श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा और प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी.
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