फीस बढ़ोतरी पर बवाल, गाजियाबाद के DAV स्कूल के बाहर अभिभावकों का प्रदर्शन
गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित DAV पब्लिक स्कूल में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ अभिभावकों ने प्रदर्शन किया. 23 से 30 प्रतिशत वृद्धि पर विरोध हुआ, जिसके बाद प्रबंधन ने इसे घटाकर 7.5 प्रतिशत करने का आश्वासन दिया.
गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित राजेंद्र नगर DAV पब्लिक स्कूल में फीस बढ़ोतरी को लेकर अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया. बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल के बाहर एकत्र हुए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया. उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने नियमों को दरकिनार करते हुए 23 से 30 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी. इस मुद्दे के साथ-साथ स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठाए गए. स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करना पड़ा.
फीस बढ़ोतरी पर फूटा गुस्सा
अभिभावकों का कहना है कि अचानक इतनी ज्यादा फीस बढ़ोतरी करना गलत है. उनका आरोप है कि यह वृद्धि सरकार द्वारा तय दिशा-निर्देशों के खिलाफ है. प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने नारेबाजी की और प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई. उनका कहना है कि इस तरह की बढ़ोतरी से मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है.
स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर कई अन्य आरोप भी लगाए. उनका कहना है कि स्कूल में कुप्रबंधन है और बच्चों पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है. एक ही दिन में दो परीक्षाएं लेने की शिकायत भी सामने आई. इसके अलावा फीस जमा करने के लिए बहुत कम समय दिया जाता है और अभिभावकों के साथ बदसलूकी की जाती है.
छात्रों पर बढ़ता तनाव
अभिभावकों ने यह भी कहा कि कक्षाओं में छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा है. एक कक्षा में 70 से 75 बच्चे बैठते हैं, जिससे पढ़ाई का स्तर प्रभावित होता है. बच्चों पर पढ़ाई और परीक्षाओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है. इससे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने की चिंता जताई गई है.
पुलिस ने संभाली स्थिति
प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद पुलिस को मौके पर बुलाया गया. पुलिस ने स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया और दोनों पक्षों से बातचीत कर मामला संभाला. अधिकारियों की मौजूदगी में अभिभावकों की बात सुनी गई और उन्हें आश्वासन दिया गया कि मामले का समाधान निकाला जाएगा.
प्रबंधन का आश्वासन और आगे की राह
विरोध के बाद स्कूल प्रबंधन ने फीस बढ़ोतरी को घटाकर 7.5 प्रतिशत तक सीमित करने का आश्वासन दिया है. हालांकि अभिभावकों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा. अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे क्या कदम उठाए जाते हैं.
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